एक था लाला हरफन मौला कमती नापा कमती तौला
एक-एक के करता तीस पूरा बड़ा चार सौ बीस
बस में उसके अफसर सारे लाखो किये उआरे नियारे
और जाली परमिट बनवाये रिश्वत देकर पास कराये
कोई मामला फसता पाया ले दे करके उसे बचाया
एसा बड़ा कमाल हुआ था लाला माला माल हुआ था
ब्लेक किया और खूब कमाया फिर अपना बंगला बनवाया
एक बार कुछ होनी आयी बड़ी शिकस्त उन्होंने खाई
ब्लेक में उसका फस गया लड़का सुनकर उसका दिल भी धड़का
जरा नहीं वह हिम्मत हारे कोशिश भी कर रहे विचारे
खूब चले वह डर कर चाल करता न देखी गलती दाल
शोर हुआ था एसा भारी डरे सभी छोटे अधिकारी
एडी चोटी का जोर लगाया फिर भी उसको बचा न पाया
डिप्टी के यहाँ गया मुकदमा इसका उनको बहुत था सदमा
उस डिप्टी की सुनकर सख्ती आई मन में थी कमबख्ती
मुसलमान था सच्चा डिप्टी चली नहीं वहाँ फिफ्टी फिफ्टी
खुदा की करता रोज इबादत करू न्याय थी एसी आदत
लाला जी कोशिश कर हारे लगी ना नैया किसी किनारे
कुछ तरकीब समझ में आई तुरतहि उसकी जुगत बुनाई
लेता नहीं वह रिश्वत जानू पर मै दिए बिना नहीं मानू
थोड़ी अशर्फी अपने संग ले पहुच गया डिप्टी के बंगले
चपरासी को पास बुलाया अपना मतलब उसे बताया
उसको १०० का नोट दिखाया सुनकर था वह भी घबराया
उसने कहा लाला घर जाओ मेरी नौकरी मत छुडवाओ
मै साहब की आदत जानू इस लिए मै कुछ न मानू
लाला बोले काम करो तुम मन में बिलकुल नहीं डरो तुम
कहू ठीक मै जाच ना होगी तुम पर कोई आच ना होगी
फट से मेरा काम बनादो उसका टट्टी घर बतलादो
उसने सोचा हर्ज क्या मेरा कोई न देखे हुआ अँधेरा
फ़ौरन नोट जेब में डाला गला-कटा था वो भी साला
टट्टी घर का पता बताया लाला तुरत वह पर आया
टार्च जला कर लोटा देखा रखा लोटा छोटा देखा
भरी अशर्फी लुटिया रखदी उसी तरह पहेले सी कर दी
खुशी खुशी घर लाला आया नहीं किसी को कुछ बतलाया
उड़ गई निदिया छोर बसेरा डिप्टी जगा हुआ सवेरा
बाहर रख कर थोड़ी मिट्टी गया था डिप्टी करने टट्टी
आब्दस्त का वक्त जो आया धर पर लोटा तुरत उठाया
जब लोटे को जरा घुमाया गिरी अशर्फी खनखन माया
घबराकर के ध्यान लगाया ध्यान किया और फिर घबराया
सर्पा ओर पटर लगवाया यहाँ आदमी कैसे आया
देख माजरा वह चकराया समझ में उसकी एसा आया
पाच वक्त का हू मै नमाजी शायद खुदा हुआ है राजी
खुदा वक्त की कुदरत न्यारी फज़ल किया दी दौलत भारी
उम्र हुइ नहीं रिश्वत ली है नहीं तकलीफ किसी को दी है
इमान से बन्दा नहीं हिला है शायद उसका सिला मिला है
बांध अशर्फी आया बाहर बेगम से सब किया उजागर
मिले हजारों नहीं थे वे कम देख हुइ थी बेगम बेगम
भेद किसी को नहीं बताया आपस में ही जश्न मनाया
जब पेशी का दिन था आया लाला ने प्रोग्राम बनाया
घर था आया तागे वाला बैठ कचहरी पंहुचा लाला
चपरासी ने टेर लगायी उनके भनक कान में आई
फ़ौरन तभी वकील बुलाया साथ उसी के लाला आया
डिप्टी भी है फसता आला उसका था इल्जाम निराला
खडा बकील जिरत हुई जारी देख लाला की तुम होसियारी
अब लाला ने मुह कुछ खोला तभी जोड़ हाथ वो बोला
हजूर रहम मुजपर फरमाए जरा सोच कर कलम चलाये
मै हजूर टट्टी का लोटा हुआ आपका खरा ना खोटा
जब लाला ने अर्ज सुनाई सुन डिप्टी की मति चकराइ
अब वह बात समझ में आयी तब हाकिम ने नजर घुमाई
भला बात क्या कहता सुनता दिल ही दिल में जलता भुनता
बात हलक में अटकी आये निगल सके न उगली जाये
अजब बात कुछ कही ना जाती नजर मिले नहीं थी शर्माती
असमंजास में पड़ा हुआ था पर लाला भी अडा हुआ था
सोच समझ डिप्टी मुस्काया फिर लिखने में ध्यान लगाया
लिख कर के जजमेंट बनाया सबको पढकर वही सुनाया
बरी किया हमने यह लड़का सुनकर लाला का दिल धड़का
यह रिश्वत की पतिया भाई जो भारत में कुंज समाई
gr8
ReplyDeletetatti kaa lotaa.........
ReplyDeletebahut badiyaa
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